राम नाम के हीरे मोती मैं बिखराऊँ गली-गली
लेलो रे कोई राम का प्यारा, शोर मचाऊँ गली-गली
1. माया के दीवानों सुन लो इक दिन ऐसा आयेगा; धन दौलत और माल खजाना यहीं पड़ा रह जायेगा
सुन्दर काया मिट्टी होगी, चर्चा होगी गली-गली; लेलो रे कोई राम का प्यारा
2. क्यों करता तू मेरा मेरी यह तो तेरा मुकाम नहीं; झूठे जग में फंसा हुआ है वह सच्चा इंसान नहीं
जग का मेला दो दिन का है अन्त में होगी चला-चली; लेलो रे कोई राम का प्यारा
3. जिस-जिस ने यहाँ मोती लूटे वह तो मालामाल हुए; धन दौलल के बने पुजारी आखिर वह कंगाल हुए
चाँदी सोने वालों सुन लो बात सुनाऊँ खरी-खरी; लेलो रे कोई राम का प्यारा
4. दुनिया को तू कब तक पागले अपनी कहलायेगा; ईश्वर को तू भूल गया है अन्त समय पछतायेगा
दो दिन का यह चमन खिला है फिर मुरझाये कली-कली
राम नाम के हीरे मोती मैं बिखराऊँ गली-गली