श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून

छन्द

नमन ग्रन्थ के सम्पूर्ण 16 छन्द — गुरु-परम्परा की स्तुति में रचित पारम्परिक छन्द। सूची में से किसी भी छन्द के नाम पर क्लिक करें।

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मेरी वन्दना तेरे आगे बारम्बार बाबा जी।

धन बाबा तुलसीदास गड़ी शहर तेरा स्थान, जांवई चरणां तो कुरबान।

तेरे दर्शन नूँ मेरे बाबा जी सब संगत आई होयी आ।

नाम तेरे दा मैं यश पिया गांवा, तैनूं ध्यावां मैं तैनू ध्यावां

दर तेरे ते आवां बाबा–तू है सिद्ध महान जी, मुश्किल करो आसान जी।

जिन्हां सिदक गुरां ते रखया उनानें सब कुछ पाया है।

एतवार दा लागदा मेला बड़ा बणया है आनन्द, धन बाबा सफाचन्द

झगड़ों में दिल न फँसा बाबा; गुण नित दिन कृष्ण के गा बाबा।

धन बाबा तुलसी दास साड़ी पूरी कर देओ आस।

इक बार तुवाड़ी रहमत दा, थोड़ा वी इशारा हो जावे।

अपनी गादी दा नाल समाधि दा दर्श कराते। सानूँ गढ़ी कपूर पहुँचा दे।

मैं शरणी आंवई, धन तुलसीदास गादियों वाले, मैं शरणी आंवई

धन बाबा सफाचन्द मैं हर वेले कर्ई याद रामटन्ड तेरी समाधि।

दर तेरे मैं आया हूँ, मुझको विश्वास है

तुलसी दास गुरु की बड़ी शान है, जान उनमें हमारी कुरवान है।

मेरे बाबा तुलसी दास गुरु, तेरी शान जहीं तो निराली है।