श्री रामायण मन्दिरShri Ramayan Mandir — Bareilly | Vikasnagar

विनयपत्रिका

गोस्वामी तुलसीदास कृत — सम्पूर्ण 279 पदों की विषयवार रूपरेखा, 13 भागों में

विनयपत्रिका गोस्वामी तुलसीदास जी की एक अत्यन्त मार्मिक भक्ति-रचना है, जिसमें कुल 279 पद हैं। यहाँ इसकी सम्पूर्ण विषयवार रूपरेखा 13 भागों में दी गयी है — गणेश-सूर्य स्तुति से लेकर अन्तिम शरणागति-प्रार्थना तक। नमन ग्रन्थ के 7 चुनिन्दा पद यहाँ मूल रूप में उपलब्ध हैं; सम्पूर्ण 279 पदों के मूल पाठ हेतु प्रामाणिक मुद्रित संस्करण का अवलोकन करें।

श्री गणेश एवं सूर्य स्तुति (पद 1-2)

विनय पत्रिका का शुभारम्भ पारम्परिक मंगलाचरण की भाँति श्री गणेश जी की वन्दना से होता है, जि…

शिव स्तुति (पद 3-14)

इसके पश्चात भगवान शिव की विस्तृत स्तुति है (कुल 12 पद), जिसमें तुलसीदास जी शिवजी को श्रीरा…

देवी, गंगा एवं यमुना स्तुति (पद 15-21)

आगे देवी भगवती, माँ गंगा एवं यमुना जी की स्तुति है। गंगा जी को यहाँ मोक्षदायिनी एवं पाप-ना…

काशी एवं चित्रकूट स्तुति (पद 22-24)

तत्पश्चात भगवान शिव की नगरी काशी तथा श्रीराम के वनवास-स्थल चित्रकूट की स्तुति है। दोनों ही…

हनुमत् स्तुति (पद 25-36)

विनय पत्रिका का यह भाग (12 पद) हनुमान जी की स्तुति को समर्पित है। इसमें हनुमान जी की अपार …

लक्ष्मण, भरत एवं शत्रुघ्न स्तुति (पद 37-40)

इसके पश्चात श्रीराम के तीनों अनुज — लक्ष्मण, भरत तथा शत्रुघ्न — की पृथक्-पृथक् स्तुति है।…

श्रीसीता स्तुति (पद 41-42)

तत्पश्चात जगज्जननी श्रीसीता जी की स्तुति है। इन दो पदों में सीता जी को करुणा एवं मातृत्व क…

श्रीराम स्तुति — प्रथम भाग (पद 43-49)

इस भाग में सीधे श्रीराम की स्तुति आरम्भ होती है, जिसमें उनके नाम, रूप एवं गुणों का वर्णन ह…

श्रीराम स्तुति — द्वितीय भाग एवं अन्य स्वरूप-स्तुति (पद 50-63)

यहाँ श्रीराम की स्तुति आगे बढ़ती है, तथा इसी क्रम में श्रीरंग, नर-नारायण एवं विन्दुमाधव जी…

श्रीराम वन्दना एवं नाम-जप (पद 64-70)

इन पदों में श्रीराम-नाम के जप की महिमा का विशेष रूप से वर्णन है। तुलसीदास जी के अनुसार कलि…

विनयावली — कलियुग का वर्णन (पद 71 से आगे)

पद 71 से आरम्भ होने वाला "विनयावली" खण्ड सम्पूर्ण विनय पत्रिका का सबसे विस्तृत तथा सर्वाधि…

विनयावली — आत्मनिवेदन एवं दैन्य-भाव (मध्य भाग)

विनयावली के मध्य भाग में तुलसीदास जी अपनी ही दुर्बलताओं, अज्ञान तथा त्रुटियों को अत्यन्त न…

विनयावली — भक्ति एवं शरणागति की प्रार्थना (अन्तिम भाग)

विनयावली के अन्तिम पदों में तुलसीदास जी श्रीराम से अनन्य भक्ति, निश्छल प्रेम तथा पूर्ण शरण…