श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून

भजन

श्री रामायण मन्दिर की भजन-परम्परा — नमन ग्रन्थ के 24 भजन, गुरुजनों की स्तुति में रचित पद एवं 12 पारम्परिक (सार्वजनिक सम्पदा) भजन। सूची में से किसी भी भजन के नाम पर क्लिक करें।

श्री रामायण मन्दिर की भजन-परम्परा — नमन ग्रन्थ के 24 भजन, गुरुजनों की स्तुति में रचित पद एवं 12 पारम्परिक (सार्वजनिक सम्पदा) भजन। सूची में से किसी भी भजन के नाम पर क्लिक करें।

दर तेरे आवों गुण गावों

करे सबदी जो परवा, मेरा बाबा बेपरवाह

सीताराम, सीताराम, सीताराम

जादूगर श्याम मेरा दिल लुट ले गया

बाबा तुलसी के गुण गावे सारी दुनिया

प्रभु बंधे हुये खिंचे हुए चले आयेंगे

लिखन वालेया तू होके दयाल लिख दे

जहाँ ले चलोगे वहीं मैं चलूँगा

माँ अंजनी के लाल थोड़ा ध्यान दीजिए

मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है

मैली चादर ओढ़ के कैसे

सतगुरू दीन दयाल तों, वारी जा बलिहारी जा

मेरी लगी श्याम संग प्रीत, दुनिया क्या जाने

मेरा छोटा सा संसार हरि आ जाओ एक बार

बाबा जी मैं तेरी पतंग

पायो जी मैंने राम रतन धन पायो

तेरेयीं चरणां विच मेरी अरदास दाता

राम नाम के हीरे मोती मैं बिखराऊँ गली-गली

यह दुनिया मुसाफिर खाना

आये तेरे द्वार नमस्कार-नमस्कार

आओ तुम्हें भगवान का दरबार दिखायें

पिला दे ओ साकी, हरि नाम की मस्ती

रामा रामा रामा मेरे प्यारे रामा

आसरा इस जहाँ का मिले न मिले

पारम्परिक भजन · सार्वजनिक सम्पदा

रघुपति राघव राजा राम

ठुमक चलत रामचंद्र

चदरिया झीनी रे झीनी

साधो, देखो जग बौराना

राम नाम की लूट

अब मैं राम सकल सिधि पाई

दुलहनी गावहु मंगलचार

सुने री मैंने निर्बल के बल राम

सीताराम सीताराम कहिये

राम नवमी सुहानी

राम सीता विवाह

अयोध्या सज रही सारी

गीतावली के पद · गोस्वामी तुलसीदास

आज सुदिन सुभ घरी सुहाई

सहेली सुनु सोहिलो रे

आजु महामङ्गल कोसलपुर सुनि नृपके सुत चारि भए

गावैं बिबुध बिमल बर बानी

घर-घर अवध बधावने मङ्गल-साज-समाज

बाजत अवध गहागहे अनन्द-बधाए

सुभग सेज सोभित कौसिल्या रुचिर राम-सिसु गोद लिये

ह्वै हौ लाल कबहिं बड़े बलि मैया

चुपरि उबटि अनाहवाइकै नयन आँजे

आजु अनरसे हैं भोरके, पय पियत न नीके

या सिसुके गुन नाम-बड़ाई

अवध आजु आगमी एकु आयो