श्री रामायण मन्दिरShri Ramayan Mandir — Bareilly | Vikasnagar

हनुमान जी और रावण की सभा

सुन्दरकाण्ड — श्रीरामचरितमानस, पंचम सोपान (9 / 13)

बँधे हुए हनुमान जी को राक्षस रावण की भरी सभा में ले आते हैं। निर्भयतापूर्वक हनुमान जी रावण के प्रश्नों का उत्तर देते हैं और उसे स्पष्ट शब्दों में समझाते हैं कि श्रीराम के समक्ष कोई भी शक्ति नहीं टिक सकती। वे रावण को नीतिपूर्वक सलाह देते हैं कि वह अभिमान त्यागकर सीता जी को सम्मानपूर्वक लौटा दे और श्रीराम की शरण ग्रहण कर ले, इसी में उसका कल्याण है।

हनुमान जी के निर्भीक और हितकारी वचन सुनकर रावण का क्रोध और बढ़ जाता है। वह हनुमान जी का वध करने का आदेश देता है, किन्तु विभीषण जी नीतिपूर्वक समझाते हैं कि दूत का वध करना उचित नहीं है — इसके स्थान पर कोई अन्य दण्ड दिया जाए। सभा में मंत्रणा के पश्चात रावण हनुमान जी की पूँछ में आग लगाने का आदेश देता है, यह सोचकर कि वानर को उसकी पूँछ अत्यन्त प्रिय होती है।

सुन्दरकाण्ड सूची पर वापस जाएँ← अशोक वाटिका विध्वंस एवं अक्षयकुमार वधलंका दहन →