विनय पत्रिका का शुभारम्भ पारम्परिक मंगलाचरण की भाँति श्री गणेश जी की वन्दना से होता है, जिसमें विघ्नहर्ता गणेश जी से ग्रन्थ-रचना निर्विघ्न पूर्ण होने की प्रार्थना की गयी है।
इसके पश्चात सूर्यदेव की स्तुति है, जिसमें जगत के प्रकाशक एवं जीवनदाता सूर्य को नमन किया गया है — यह भी शास्त्रीय परम्परा के अनुरूप है, जिसमें किसी भी बड़े स्तवन-ग्रन्थ के आरम्भ में देवताओं का यथाक्रम आवाहन किया जाता है।