विनयावली के अन्तिम पदों में तुलसीदास जी श्रीराम से अनन्य भक्ति, निश्छल प्रेम तथा पूर्ण शरणागति की याचना करते हैं।
ग्रन्थ का समापन इस दृढ़ विश्वास के साथ होता है कि श्रीराम अपने समस्त शरणागत भक्तों की रक्षा अवश्य करते हैं, चाहे वे कितने भी दीन-हीन क्यों न हों। यही भाव सम्पूर्ण विनय पत्रिका का सार है, तथा यही कारण है कि यह ग्रन्थ शताब्दियों से भक्तों के हृदय में विशेष स्थान रखता आया है।