श्री रामायण मन्दिरShri Ramayan Mandir — Bareilly | Vikasnagar

हनुमान जी की सीता जी से भेंट — मुद्रिका भेंट

सुन्दरकाण्ड — श्रीरामचरितमानस, पंचम सोपान (7 / 13)

मुद्रिका पर अंकित श्रीराम-नाम पहचानकर सीता जी के मन में हर्ष और विस्मय दोनों उमड़ पड़ते हैं। हनुमान जी वृक्ष से उतरकर विनम्रतापूर्वक अपना परिचय देते हैं — श्रीराम के दूत के रूप में। वे आद्योपान्त श्रीराम-कथा सुनाते हैं, जिसे सुनकर सीता जी को पूर्ण विश्वास हो जाता है।

सीता जी हनुमान जी को अपनी विरह-व्यथा और श्रीराम के प्रति अपने अटूट प्रेम के विषय में बताती हैं। जाते समय वे अपने शीश की चूड़ामणि उतारकर हनुमान जी को श्रीराम के लिए एक पहचान-चिह्न के रूप में सौंप देती हैं, ताकि श्रीराम को पूर्ण विश्वास हो सके कि हनुमान जी वास्तव में सीता जी से मिलकर आये हैं।

"एक बार दरसन देहु मोहि दीनदयाल बिनु काम।"
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