आगे देवी भगवती, माँ गंगा एवं यमुना जी की स्तुति है। गंगा जी को यहाँ मोक्षदायिनी एवं पाप-नाशिनी के रूप में स्मरण किया गया है, तथा यमुना जी को श्रीकृष्ण-लीलाओं की साक्षी एवं करुणामयी नदी के रूप में।
यह खण्ड भारतीय संस्कृति में पवित्र नदियों तथा आदिशक्ति के प्रति भक्त की गहरी श्रद्धा को दर्शाता है।