तत्पश्चात भगवान शिव की नगरी काशी तथा श्रीराम के वनवास-स्थल चित्रकूट की स्तुति है। दोनों ही तीर्थ तुलसीदास जी के जीवन से घनिष्ठ रूप से जुड़े रहे हैं — मान्यता है कि काशी में उन्होंने शिक्षा प्राप्त की तथा चित्रकूट में उन्हें श्रीराम के साक्षात दर्शन का सौभाग्य मिला।
इन पदों में इन दोनों पवित्र स्थलों की आध्यात्मिक महिमा का वर्णन है।