विनय पत्रिका का यह भाग (12 पद) हनुमान जी की स्तुति को समर्पित है। इसमें हनुमान जी की अपार शक्ति, भक्ति तथा श्रीराम-सेवा के प्रति उनके अनन्य समर्पण का वर्णन है।
भक्तों की रक्षा करने वाले, संकटमोचन हनुमान जी से तुलसीदास जी अपने कष्टों के निवारण की प्रार्थना करते हैं — यह भाव हनुमान चालीसा में भी समान रूप से प्रतिध्वनित होता है, जो इसी कवि की रचना मानी जाती है।