इसके पश्चात श्रीराम के तीनों अनुज — लक्ष्मण, भरत तथा शत्रुघ्न — की पृथक्-पृथक् स्तुति है।
लक्ष्मण जी की निष्काम सेवा-भावना, भरत जी की त्याग-मूर्ति छवि तथा शत्रुघ्न जी की भ्रातृ-भक्ति — तीनों को यहाँ आदर्श भ्रातृ-प्रेम के प्रतीक रूप में स्मरण किया गया है।