तत्पश्चात जगज्जननी श्रीसीता जी की स्तुति है। इन दो पदों में सीता जी को करुणा एवं मातृत्व की साक्षात् मूर्ति के रूप में वर्णित किया गया है।
भक्त-हृदय में यह भाव प्रबल है कि माता सीता की कृपा के बिना श्रीराम की भक्ति अधूरी मानी जाती है — इसीलिए स्तुति-क्रम में उन्हें भी विशेष स्थान दिया गया है।