श्री रामायण मन्दिरShri Ramayan Mandir — Bareilly | Vikasnagar

श्रीसीता स्तुति (पद 41-42)

विनयपत्रिका — गोस्वामी तुलसीदास (7 / 13)

तत्पश्चात जगज्जननी श्रीसीता जी की स्तुति है। इन दो पदों में सीता जी को करुणा एवं मातृत्व की साक्षात् मूर्ति के रूप में वर्णित किया गया है।

भक्त-हृदय में यह भाव प्रबल है कि माता सीता की कृपा के बिना श्रीराम की भक्ति अधूरी मानी जाती है — इसीलिए स्तुति-क्रम में उन्हें भी विशेष स्थान दिया गया है।

विनयपत्रिका सूची पर वापस जाएँ← लक्ष्मण, भरत एवं शत्रुघ्न स्तुति (पद 37-40)श्रीराम स्तुति — प्रथम भाग (पद 43-49) →