श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
भजन

चदरिया झीनी रे झीनी

चदरिया झीनी रे झीनी, राम नाम रस भीनी। टेक

अष्ट कमल का चरखा बनाया, पाँच तत्व की पूनी।

नौ दस मास बुनन को लागे, मूरख मैली कीनी। १

जब मोरे चादर बन घर आई, रंगरेज को दीनी।

ऐसा रंग रंगा रंगरेज ने, लालों लाल कर दीनी। २

चादर ओढ़ शंका मत करियो, दो दिन तुमको दीनी।

मूरख लोग भेद नहिं जाने, दिन दिन मैली कीनी। ३

ध्रुव प्रह्लाद सुदामा ने ओढ़ी, शुकदेव ने निर्मल कीनी।

दास कबीर ने ऐसी ओढ़ी, ज्यों की त्यों धरि दीनी। ४

स्रोत: पारम्परिक (संत कबीर) · सार्वजनिक सम्पदा