श्री रामायण मन्दिर गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज की गुरु-शिष्य परम्परा (गद्दी) में स्थापित एक आध्यात्मिक संस्था है, जिसके वर्तमान में दो केन्द्र हैं। नीचे दोनों केन्द्रों का संक्षिप्त परिचय है — विस्तृत जानकारी हेतु सम्बन्धित पृष्ठ देखें।
27 मई 1964 को गोस्वामी रामेश्वर दास जी द्वारा स्थापित मुख्य केन्द्र। गर्भ गृह में श्री रामचरितमानस एवं अनेक विग्रह स्थापित हैं; 6500 वर्गफुट का वातानुकूलित सत्संग भवन है। प्रतिवर्ष 15-दिवसीय तुलसी जयन्ती महोत्सव यहीं आयोजित होता है।
पंजाबी कालोनी, विकासनगर (देहरादून) में स्थित मन्दिर की दूसरी शाखा। श्रद्धालु यहाँ दर्शन एवं सत्संग में सम्मिलित होते हैं तथा UPI द्वारा सेवा-सहयोग कर सकते हैं।
श्री रामायण मन्दिर की गुरु-गद्दी का इतिहास अखण्ड भारत के गढ़ी कपूरा (जो अब पाकिस्तान में है) तक जाता है। विभाजन के पश्चात् यह परम्परा बरेली पहुँची और 1964 में वर्तमान मन्दिर की नींव पड़ी।