श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून

नित्य कर्म

पूजा प्रकाश एवं दैनिक प्रार्थनायें — नमन, पृष्ठ 108-116
प्रातः जागरण के पश्चात स्नान से पूर्व के नित्य कर्म

ब्रह्म मुहूर्त में जागरण — सूर्योदय से चार घड़ी (लगभग डेढ़ घंटे) पूर्व ब्रह्म मुहूर्त में ही जग जाना चाहिये। इस समय सोना शास्त्र में निषिद्ध है।

करावलोकन — आँखों के खुलते ही दोनों हाथों की हथेलियों को देखते हुये निम्नलिखित श्लोक का पाठ करें —

कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती।
करमूले स्थितो ब्रह्मा, प्रभाते कर दर्शनम्।।

भूमि वन्दना — शैय्या से उठकर पृथ्वी पर पैर रखने के पूर्व पृथ्वी माता का अभिवादन करें —

समुद्र वसने देवि पर्वतस्तनमण्डिते।
विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यं पादस्पर्शं क्षमस्व में।।

मानसिक शुद्धि का मन्त्र —

ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा।
यः स्मरेत् पुण्डरीकाकां स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः।।

श्रीगोविन्ददामोदर स्तोत्रम्

श्रीगोविन्ददामोदर स्तोत्रम् (10 श्लोक)

करारविन्देन पदारविन्दं मुखारविन्दे विनिवेशयन्तम्। वटस्य पत्रस्य पुटे शयानं बालं मुकुन्द मनसा स्मरामि।।1।। श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारे हे नाथ नारायण वासुदेव। जिह्वे पिबस्वामृतदेव गोविन्द दामोदर माधवेति।।2।। विक्रेतु–कामाखिलगोपकन्या मुरारिपादार्पित चित्तवृत्तिः। दध्यादिकं मोहवशादवोचद् गोविन्द दामोदर माधवेति।।3।। गृहे गृहे गोपवधूकदम्बाः सर्वे मिलित्वा समवाप्ययोगम्। पुण्यानि नामानि पठन्ति नित्यं, गोविन्द दामोदर माधवेति।।4।। सुखं शयाना निलये निजेऽपि नामानि विष्णोः प्रवदन्तिमर्त्याः। ते निश्चतं तन्मयतां व्रजन्ति गोविन्द दामोदर माधवेति।।5।। जिह्वैसदैवं भज सुन्दराणि नामानि कृष्णस्य मनोहराणि। समस्त भक्तार्तिविनाशनानि गोविन्द दामोदर माधवेति।।6।। सुखावसाने इदमेवसारं दुःखावसाने इदमेव ज्ञेयम।। देहावसाने इदमेव जाप्यं गोविन्द दामोदर माधवेति।।7।। जिह्वैरसज्ञे मधुरप्रिया त्वं सत्यं हितं त्वां परमं वदामि। आवर्णय त्वं मधुराक्षराणि गोविन्द दामोदर माधवेति।।8।। त्वामेव याचे मम देहि जिह्वे समागते दण्डधरे कृतान्ते। वक्तव्यमेवं मधुरं सुभक्त्या गोविन्द दामोदर माधवेति।।9।। श्रीकृष्ण राधावर गोकुलेश गोपाल गोवर्धन नाथ विष्णो। जिह्वे पिवस्मामृतमेतदेव गोविन्द दामोदर माधवेति।।10।।

गुरू वन्दना

गुरू ब्रहमा गुरू विष्णु गुरू देवो महेश्वरः। गुरू साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरूवे नमः। बंदउ चरण सरोज गुरू, मुद मंगल आगार। जेहि सेवत नर होत है, भव सागर से पार।। गुरू के सुमिरण मात्र से नाशत विघ्न अनन्त। तातें सर्वारम्भ में, ध्यावत हैं सब संत।।

गणेश वन्दना

ऊँ गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजम्बूफलचारूभक्षणम। उमासुतं, शोकविनाशकारकम् नमामि विघ्नेश्वरपादपंकजम्।।

महामृत्युंजय मन्त्र

ऊँ हौं जूं सः। ऊँ भूः भुवः स्वः। ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे, सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारूकमिव बन्धनात् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् स्वः भुवः भूः ऊँ। सः जूं हौं ऊँ।।

मन्त्र वन्दना एवं स्नान मन्त्र

क. करागे वसते लक्ष्मी: करमध्ये सरस्वती। करमूले स्थितो ब्रह्मा, प्रभाते कर दर्शनम्।। ख. समुदवसने देवी पर्वत स्तन मण्डले। विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यं पाद स्पर्श क्षमस्व में।। स्नान के पूर्व जल स्पर्श कर मन्त्र बोलिए :– गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती। नर्मदे सिन्धु कावेरी जलेऽस्मिन् सन्निधिं करू।। पुष्कराद्यानि तीर्थानि गंगाद्याः सरितस्तथा। अगच्छन्तु मया प्रोक्ताः स्नान काले सदा मम।। प्रदक्षिणा मन्त्र यानि कानि च पापानि जन्मान्तर कृतानि च। तानि तानि प्रणश्यन्ति प्रदक्षिणा पदे पदे।। सूर्य को अर्घ्य देने का मंत्र ऊँ एहि सूर्य सहस्रांशो तेजो राशे जगतपते। अनुकम्पय मां भक्तया गृहाणार्घ्य दिवाकरः।। तुलसीं वन्दन तुलसि! श्री सखि शिवे पापहारिणी पुण्यदे। नमस्ते नारदनुते नमो नारायण प्रियें।। ऊँ पृथ्वी त्वया धृता लोका देवि त्वं विष्णुना धृता। त्वं च धार्य मां देवि पवित्रं कुरू चासनम्।।
क्षमा प्रार्थना

क्षमा प्रार्थना

नमन ग्रन्थ के इस पृष्ठ (116) का निचला भाग मूल स्कैन में प्रकाश की स्थिति व अंगुली की छाया के कारण आंशिक रूप से अपठनीय है। सामान्यतः पूजन के अन्त में क्षमा प्रार्थना पढ़ने की परम्परा है। पूर्ण, स्पष्ट पाठ हेतु मूल पुस्तक की पुनः जाँच आवश्यक होगी।
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