श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
गुरु भजन

बलिहारी गुर आपणे

बलिहारी गुर आपणे दिउहाड़ी सद वार ॥

जिनि माणस ते देवते कीए करत न लागी वार ॥१॥

नानक गुरू न चेतनी मनि आपणै सुचेत ॥

छुटे तिल बूआड़ जिउ सुंञे अंदरि खेत ॥

खेतै अंदरि छुटिआ कहु नानक सउ नाह ॥

फलीअहि फुलीअहि बपुड़े भी तन विचि सुआह ॥३॥

स्रोत: पंजाबी गुरु-वाणी · देवनागरी लिप्यंतरण · सार्वजनिक सम्पदा