बलिहारी गुर आपणे
बलिहारी गुर आपणे दिउहाड़ी सद वार ॥
जिनि माणस ते देवते कीए करत न लागी वार ॥1॥
नानक गुरू न चेतनी मनि आपणै सुचेत ॥
छुटे तिल बूआड़ जिउ सुंञे अंदरि खेत ॥
खेतै अंदरि छुटिआ कहु नानक सउ नाह ॥
फलीअहि फुलीअहि बपुड़े भी तन विचि सुआह ॥3॥
पंजाबी गुरु-वाणी · देवनागरी लिप्यंतरण · सार्वजनिक सम्पदा