संत रैदास : गुरु-वाणी
गुरु मिलिया रविदास जी, दीनी ज्ञान की गुटकी।
चोट लगी निजनाम हरी की, म्हारे हिवरे खटकी॥
गुरु ग्यांन दीपक दिया, बाती दइ जलाय।
रैदास हरि भगति कारनै, जनम मरन विलमाय॥
स्रोत: संत रैदास · सार्वजनिक सम्पदा
गुरु मिलिया रविदास जी, दीनी ज्ञान की गुटकी।
चोट लगी निजनाम हरी की, म्हारे हिवरे खटकी॥
गुरु ग्यांन दीपक दिया, बाती दइ जलाय।
रैदास हरि भगति कारनै, जनम मरन विलमाय॥
स्रोत: संत रैदास · सार्वजनिक सम्पदा