पूर्व पीठाधीश्वर (दिवंगत)
जीवन परिचय
गोस्वामी देवेंद्र जी महाराज, गोस्वामी रामेश्वर दास जी महाराज के पुत्र थे। उनका जीवन उस पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करता है जिसने विभाजन की यात्रा स्वयं नहीं की, लेकिन विस्थापन से बनी संस्था की जिम्मेदारी विरासत में पाई। पिता ने मंदिर की नींव रखी थी; देवेंद्र जी महाराज को उसके भीतर चलती आध्यात्मिक परम्परा को आगे बढ़ाना था।
गोस्वामी तोताराम जी महाराज के महाप्रयाण के बाद देवेंद्र जी महाराज गुरु गद्दी पर विराजमान हुए। यह उत्तराधिकार मंदिर के संस्थापक परिवार और गुरु परम्परा को नए रूप में जोड़ता है। रामेश्वर दास जी महाराज का पुत्र उस आध्यात्मिक दायित्व को ग्रहण करता है जिसे पहले हरिद्वार से आए तोताराम जी महाराज ने निभाया था।
देवेंद्र जी महाराज की सार्वजनिक भूमिका गुरु पूर्णिमा, भजन, आरती, सत्संग और सामुदायिक भंडारों में दिखाई देती थी। श्रद्धालु उनके पास पूजा और आशीर्वाद के लिए आते थे। उनके नेतृत्व में गुरु का स्थान केवल मंच पर विराजमान व्यक्ति का नहीं, अलग-अलग परिवारों को साझा परम्परा में जोड़ने वाले केंद्र का था।
उनके धार्मिक जीवन में व्यक्तिगत आशीर्वाद, सामूहिक भक्ति और सेवा एक साथ चलते थे। मंदिर पर्वों और सत्संगों के माध्यम से केवल पूजा का स्थान नहीं रहा; वह समुदाय के मिलने, संबंध मजबूत करने और नई पीढ़ी को परम्परा से परिचित कराने का केंद्र भी बना रहा।
उनके महाप्रयाण के बाद अगली गुरु गद्दी के लिए परिवार और समिति में विचार हुआ। समिति ने उनके पुत्र गोस्वामी योगेश जी महाराज को यह दायित्व सौंपा। इस निर्णय में पारिवारिक निरन्तरता के साथ सामुदायिक स्वीकृति भी जुड़ी थी।
देवेंद्र जी महाराज तीन पीढ़ियों को जोड़ने वाली कड़ी बने—गोस्वामी मूलराज जी महाराज की विस्थापित पीढ़ी, रामेश्वर दास जी महाराज की निर्माणकर्ता पीढ़ी और योगेश जी महाराज की वर्तमान पीढ़ी। उन्होंने बने हुए मंदिर को सक्रिय श्रद्धा, पर्व, सेवा और सामुदायिक संगति के रूप में जीवित रखा।