रामायण मन्दिर की गुरु-शिष्य परम्परा के मूल आदि गुरु। इनका सम्पूर्ण कथात्मक जीवन-परिचय — जन्म, बाल्यकाल, विवाह, वैराग्य, हनुमान जी का साक्षात्कार, श्रीरामचरितमानस एवं विनयपत्रिका की रचना, काशी की घटनायें, महाप्रयाण — नमन ग्रन्थ के "तुलसी चरित" अंश में विस्तार से वर्णित है। हनुमान चालीसा, बजरंग बाण एवं हनुमान बाहुक जैसे सुप्रसिद्ध पाठों की रचना भी स्वयं गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा की गई (देखें "पाठ" पृष्ठ)।
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