जीवन परिचय
मूलचन्द और मूलराज एक ही व्यक्ति के दो प्रचलित नाम हैं। वे बाबा नन्द लाल के पुत्र और गोस्वामी रामेश्वर दास के पिता थे। उनकी पीढ़ी ने उस बड़े ऐतिहासिक परिवर्तन का सामना किया जिसने उत्तर-पश्चिम में बसे असंख्य परिवारों का जीवन बदल दिया।
1947 के विभाजन के समय मूलराज को मर्दान का अपना परिचित संसार छोड़ना पड़ा। वे अपने पुत्र रामेश्वर दास के साथ बरेली पहुँचे। यह केवल एक स्थान से दूसरे स्थान की यात्रा नहीं थी; इसमें घर, जीविका, पड़ोस, भाषा और धार्मिक पहचान को नए सिरे से जोड़ना था।
विस्थापित परिवार अपने साथ बहुत कम भौतिक वस्तुएँ ला सके, लेकिन नाम, स्मृतियाँ, पूजा-पद्धतियाँ और गुरु परम्परा उनके भीतर सुरक्षित रहीं। मूलराज की पीढ़ी ने खोए हुए संसार की स्मृति को अगली पीढ़ी तक पहुँचाया।
बरेली में आगे जो धार्मिक केंद्र खड़ा हुआ, उसमें उनके पुत्र रामेश्वर दास की संकल्पशक्ति दिखाई देती है। उसके पीछे मूलराज की पीढ़ी का अनुभव था—एक पीढ़ी जिसने अपना घर खोया और अगली पीढ़ी को नए नगर में सामुदायिक घर बनाने की प्रेरणा दी।