जीवन परिचय
मर्दान के बाबा नन्द लाल आधुनिक पारिवारिक कथा की जड़ पर खड़े दिखाई देते हैं। उनके तीन पुत्र थे—दशबन्दी राम, मेहर दास और मूलराज। आगे चलकर इन्हीं में से दो शाखाएँ गुरु परम्परा और बरेली के धार्मिक केंद्र की कहानी में विशेष रूप से दिखाई देती हैं।
दशबन्दी राम की शाखा गोस्वामी तोताराम तक पहुँची, जिन्होंने हरिद्वार से बरेली आकर गुरु गद्दी संभाली। मूलराज की शाखा उनके पुत्र रामेश्वर दास और फिर पौत्र देवेंद्र तक पहुँची। एक शाखा ने आध्यात्मिक नेतृत्व दिया और दूसरी ने विस्थापन के बाद नए मंदिर तथा सामुदायिक केंद्र के निर्माण को आगे बढ़ाया।
नन्द लाल की स्मृति उस पुराने परिवार-केंद्र की है जहाँ से बाद की कथा अलग-अलग दिशाओं में फैलती है। उनके वंशजों ने सीमा बदलने, घर छूटने और नए नगर में जीवन आरम्भ करने के बावजूद अपने संबंधों और धार्मिक परम्परा को जीवित रखा।