है राजा राम तेरी आरती उतारूँ
आरती उतारूँ मैं तन मन वारूँ
है राजा राम तेरी आरती उतारूँ।
01– कनक सिंहासन राजत जोड़ी,
दशरथ नंदन जनक किशोरी,
युगल छवि को सदा निहारूँ
है राजा राम तेरी आरती उतारूँ।
02– अगर कपूर की बाती जगमग,
मन मेरा प्रभु हो तुम–सा निश्चल,
निश्छल मन से शीश निवारूँ,
है राजा राम तेरी आरती उतारूँ।