तुहाडी आरती गादी के लाल, के दाता दयाल जी
मैं गावां द्वार तुहाडे।
1. सोने की थाली में ज्योत जगावां, सुन्दर तुहाडी गादी दा यश पिया गावां।।
तेरी गादी तो जावां बलिहार, कि दाता दयाल, जी मैं गावां द्वार तुहाडे।।
2. धन्य धन्य बाबा तुलसी दास स्वामी, घट घट दे तुसी अन्तर्यामी।
तेरी महिमा अपर अपार, कि दाता दयाल जी; मैं गावां द्वार तुहाडे।
3. अपर अपार तुम्हारी माया, इसदा भेद किसे नहीं पाया।
ऋषि मुनि गये हार, न पाया पार, मैं गावां द्वार तुहाडे।
4. द्वार तेरे मैं नित पिया आवाँ, सुन्दर तुहाडी गादी दा यश पिया गावां।
तेरी गादी तो जावां बलिहार, कि दाता दयाल जी मैं गावां द्वार तुहाडे।
5. सेवक आये शरण तुम्हारी, मेरे बाबा जी तू हे संकट हारी।
तेरे दास की है यह पुकार, करो बेड़ा पार मैं गावां द्वार तुहाडे।
6. जो बाबा तुहाड़ी आरती गावे, मन वांछित सोई फल पावे
होंदा भव से पार, सुनो करतार, सच्चा दरबार, भरे नी भण्डार, मैं गावां द्वार तुहाडे।