श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
भजन · गीतावली

आजु महामङ्गल कोसलपुर सुनि नृपके सुत चारि भए

आजु महामङ्गल कोसलपुर सुनि नृपके सुत चारि भए

राग बिलावल

आजु महामङ्गल कोसलपुर सुनि नृपके सुत चारि भए |

सदन-सदन सोहिलो सोहावनो, नभ अरु नगर-निसान हए ||

सजि-सजि जान अमर-किन्नर-मुनि जानि समय-सम गान ठए |

नाचहिं नभ अपसरा मुदित मन, पुनि-पुनि बरषहिं सुमन-चए ||

अति सुख बेगि बोलि गुरु भूसुर भूपति भीतर भवन गए |

जातकरम करि कनक, बसन, मनि भूषित सुरभि-समूह दए ||

दल-फल-फूल, दूब-दधि-रोचन, जुबतिन्ह भरि-भरि थार लए |

गावत चलीं भीर भै बीथिन्ह, बन्दिन्ह बाँकुरे बिरद बए ||

कनक-कलस, चामर-पताक-धुज, जहँ तहँ बन्दनवार नए |

भरहिं अबीर, अरगजा छिरकहिं, सकल लोक एक रङ्ग रए ||

उमगि चल्यौ आनन्द लोक तिहुँ, देत सबनि मन्दिर रितए |

तुलसिदास पुनि भरेइ देखियत, रामकृपा चितवनि चितए ||

स्रोत: गीतावली · गोस्वामी तुलसीदास · सार्वजनिक सम्पदा  ·  सम्पूर्ण गीतावली में पढ़ें →