श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
भजन

दुलहनी गावहु मंगलचार

दुलहनी गावहु मंगलचार,

हम घरि आए हो राजा राम भरतार॥टेक॥

तन रत करि मैं मन रत करिहूँ, पंचतत्त बराती।

राम देव मोरैं पाँहुनैं आये मैं जोबन मैं माती॥

सरीर सरोवर बेदी करिहूँ, ब्रह्मा वेद उचार।

रामदेव सँगि भाँवरी लैहूँ, धनि धनि भाग हमार॥

सुर तेतीसूँ कौतिग आये, मुनिवर सहस अठ्यासी।

कहै कबीर हँम ब्याहि चले हैं, पुरिष एक अबिनासी॥

संत कबीर · सार्वजनिक सम्पदा