श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
भजन

अब मैं राम सकल सिधि पाई

अब मैं राम सकल सिधि पाई, आन कहूँ तौ राम दुहाई॥टेक॥

इहि विधि बसि सबै रस दीठा, राम नाम सा और न मीठा।

और रस ह्नै कफगाता, हरिरस अधिक अधिक सुखराता॥

दूजा बणज नहीं कछु वाषर, राम नाम दोऊ तत आषर।

कहै कबीर हरिस भोगी, ताकौं मिल्या निरंजन जोगी॥

स्रोत: पारम्परिक (संत कबीर) · सार्वजनिक सम्पदा