श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
भजन

मैली चादर ओढ़ के कैसे

मैली चादर ओढ़ के कैसे, द्वार तुम्हारे आऊं।

हे पावन परमेश्वर मेरे, मन ही मन शरमाऊं।।

1) तुमने मुझको जग में भेजा, देकर निर्मल काया।

आकर के संसार में मैंने, इसमें दाग लगाया।

जनम-जनम की मैली चादर, कैसे दाग छुड़ाऊं।

2) निर्मल वाणी पाकर तुमसे, नाम न तेरा गाया।।

नैन मूंद कर हे परमेश्वर, कभी न ध्यान लगाया।

मन वीणा के तार टूटे, अब क्या गीत सुनाऊं।।

3) इन पैरों से चलकर तेरे, मन्दिर कभी न आया।।

जहाँ-जहाँ हो पूजा तेरी, कभी न शीश झुकाया।।

हे हरि हर मैं हार के आया, अब क्या हार चढ़ाऊं।।