श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
भजन · गीतावली

सुभग सेज सोभित कौसिल्या रुचिर राम-सिसु गोद लिये

सुभग सेज सोभित कौसिल्या रुचिर राम-सिसु गोद लिये

राग बिलावल

सुभग सेज सोभित कौसिल्या रुचिर राम-सिसु गोद लिये |

बार-बार बिधुबदन बिलोकति लोचन चारु चकोर किये ||

कबहुँ पौढ़ि पयपान करावति, कबहूँ राखति लाइ हिये |

बालकेलि गावति हलरावति, पुलकति प्रेम-पियूष पिये ||

बिधि-महेस, मुनि-सुर सिहात सब, देखत अंबुद ओट दिये |

तुलसिदास ऐसो सुख रघुपति पै काहू तो पायो न बिये ||

स्रोत: गीतावली · गोस्वामी तुलसीदास · सार्वजनिक सम्पदा  ·  सम्पूर्ण गीतावली में पढ़ें →