धन बाबा तुलसी दास साड़ी पूरी कर देओ आस।
गादियाँ वाले अपने सेवकौं दे दुखड़े मिटा दे।
तेरी महिमा है पीरा बेअन्त, तैनूँ सेवे सब जीव जन्तु; तू है पूर्ण फकीर बख्शो मैनूँ नजीर।
गढ़ी शहर विच सी तेरा स्थान, जित्थे बण गया पाकिस्तान; तेरा थां रह गया साडा दिल बह गया।
दर तेरे ते जो नित पिया आवे हाथ बनके ते शीश निवावे; जेड़ा दर तेरे ते आन्दा, ओ ना खाली जान्दा, आस पुजावे
दुनियाँ से तूने प्रीत हटाई, राम नाम की रटन लगाई; किया जिसने राम से प्यार, होगा उसदा बेड़ा पार।
है आजाद तेरे गुण गावे, मुझे मतियां मुरादां पिया पावे; रख ले मेरी तू लाज है गरीब निवाजा।