झगड़ों में दिल न फँसा बाबा; गुण नित दिन कृष्ण के गा बाबा।
01– ज़र पास हो यार हजार हुए; बेज़र का कोई न हुआ बाबा। झगड़ों में दिल
02– सब मतलब के नाते रिश्ते; बेमतलब कोई न हुआ बाबा। झगड़ों में दिल
03– कृपा तुझ पर मालिक ने की; भूखे को अन्न खिला बाबा। झगड़ों में दिल
04– धन यौवन मस्ती दो दिन की, अभियान में तू मत आ बाबा। झगड़ों में दिल