श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
गुरु भजन

सतगुर बोहिथु

सिरीरागु महला ४ ॥

गुण गावा गुण विथरा गुण बोली मेरी माइ ॥

गुरमुखि सजणु गुणकारीआ मिलि सजण हरि गुण गाइ ॥

हीरै हीरु मिलि बेधिआ रंगि चलूलै नाइ ॥१॥

मेरे गोविंदा गुण गावा त्रिपति मनि होइ ॥

अंतरि पिआस हरि नाम की गुरु तुसि मिलावै सोइ ॥१॥ रहाउ ॥

मनु रंगहु वडभागीहो गुरु तुठा करे पसाउ ॥

गुरु नामु द्रिड़ाए रंग सिउ हउ सतिगुर कै बलि जाउ ॥

बिनु सतिगुर हरि नामु न लभई लख कोटी करम कमाउ ॥२॥

बिनु भागा सतिगुरु ना मिलै घरि बैठिआ निकटि नित पासि ॥

अंतरि अगिआन दुखु भरमु है विचि पड़दा दूरि पईआसि ॥

बिनु सतिगुर भेटे कंचनु ना थीऐ मनमुखु लोहु बूडा बेड़ी पासि ॥३॥

सतिगुरु बोहिथु हरि नाव है कितु बिधि चड़िआ जाइ ॥

सतिगुर कै भाणै जो चलै विचि बोहिथ बैठा आइ ॥

धंनु धंनु वडभागी नानका जिना सतिगुरु लए मिलाइ ॥४॥३॥६७॥

स्रोत: पंजाबी गुरु-वाणी · देवनागरी लिप्यंतरण · सार्वजनिक सम्पदा