श्री रामायण मन्दिरShri Ramayan Mandir — Bareilly | Vikasnagar

पंडित तुलसीदास शास्त्री का रत्नावली से विवाह हुए लगभग चार वर्ष हो गये।

तुलसी चरित (कथा)

पंडित तुलसीदास शास्त्री का रत्नावली से विवाह हुए लगभग चार वर्ष हो गये। गृहस्थी के निर्वाह के लिए वे कथा बाँचते और ज्योतिष का कार्य करते हैं। समय बीतने के साथ-साथ तुलसीदास का रत्नावली के प्रति प्रेम शुक्ल पक्ष के चन्द्रमा की भाँति बढ़ता ही जा रहा था। रत्नावली के सौंदर्य और गुणों पर अत्यधिक आसक्ति के कारण तुलसीदास विवाह से पूर्व जितना समय ध्यान, योग और राम चरणों में लगाते थे सब छूट गया है।

तुलसी के सहमति देते ही ज्येष्ठ शुक्ल 13 संवत 1583, गुरूवार को शुभ मुहूर्त में उनका विवाह हो गया। रत्नावली जब भी जाना चाहती तो तुलसीदास स्वयं उसे रोक लेते थे। परन्तु होनी को कुछ और ही मंजूर था। जब तुलसी दोबारा कथा करने के लिए बाहर गये, रत्नावली अपने पीहर चली गयी।

← राजापुर पहुँच कर तुलसी को ज्ञात हुआ कि उनके जन्म के समय उनकी माता के निधन के कारण पिता आत्माराम संसार से उदासीन से हो गये।अध्याय सूची पर वापस जाएँराजापुर पहुँचते-पहुँचते रात्रि हो गयी। →