श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून

भूमिका

अध्याय 1 / 9 · सफलता के आध्यात्मिक सूत्र
अध्याय 1 / 9

भूमिका

राम तुम्हारे पास एक ऐसा ग्रंथ लाया है, जो केवल इंजील और अधिकांश पुराने धर्म-ग्रंथों ही में नहीं मिलता, बल्कि दर्शन-शास्त्र और पदार्थ-विज्ञान के नए से नए ग्रंथों में भी मिलता है । राम तुम्हें एक ऐसे धर्म का उपदेश देने आया है, जो गलियों में भी मिलता है, जो पत्तियों पर लिखा हुआ है, जो नालों द्वारा गुनगुनाया जाता है, जो पवन द्वारा कानों में सनसना रहा है, जो तुम्हारी अपनी ही नसों और नाड़ियों में फड़क रहा है ।

यह वह धर्म है, जिसका संबंध या वास्ता तुम्हारे व्यवसाय और अंतःकरण से है । यह वह धर्म है, जिसके अभ्यास के लिए तुम्हें किसी गिरजाघर, मंदिर, गुरुद्वारे या मस्जिद में जाने की जरूरत नहीं । या वह धर्म है, जिसका तुम्हें अपने नित्य जीवन में, अपनी भोजनशाला में या अपने चूल्हा-चक्की के आस-पास अभ्यास और व्यवहार करना है ।

हर कहीं तुम्हें इस धर्म का आचरण करना है । हम इसे वेदांत या फिर किसी दूसरे नाम से भी पुकार सकते हैं । वेदांत शब्द का अर्थ है—सारभूत सत्य । सत्य तुम्हारा अपना है, राम का अधिकार उस पर तुमसे अधिक नहीं है । वह किसी की मिलकियत नहीं, हर एक चीज और प्रत्येक प्राणी उसका है ।

अब हम विचार करेंगे कि इस जीवन में वेदांत हमारा मार्ग सरल और हमारे काम अधिक रुचिकर क्योंकर बनाता है । आज हम व्यावहारिक वेदांत अर्थात दूसरे शब्दों में 'सफलता के रहस्य' पर कुछ बातचीत करेंगे । वेदांत का आचरण करना ही सफलता की कुंजी है । हर एक विज्ञान की उसके अनुरूप एक कला भी होती है और आज हम वेदांत के उसी स्वरूप को लेंगे जो विज्ञान की अपेक्षा कला अधिक है, अर्थात जो अमली वेदांत है, जिसे राम 'व्यावहारिक वेदांत' के नाम से पुकारता है ।

कुछ लोग कहते हैं कि वेदांत निराशावाद की शिक्षा देता है, वेदांत नाउम्मीदी, आलस्य और सुस्ती सिखाता है । राम की उन लोगों से प्रार्थना है कि वे अपना न्याय-शास्त्र अपने ही पास रखें, और दूसरों के हाथ अपनी बुद्धि न बेचें और देखें कि वेदांत की शिक्षा जीवन, शक्ति, उद्योग और सफलता का कारण होती है या किसी और चीज का ।

यह न पूछो कि भारत का निवासी इसका व्यवहार करता है या नहीं । राम साफ कहता है कि यह केवल भारतीयों की संपत्ति नहीं है, यह हर एक की संपत्ति है । अमेरिकावासी अपने व्यावहारिक जीवन में इसका अधिक आचरण करते हैं, इसी कारण भौतिक जीवन में सफल हैं । भारतीय उस मात्रा में इसका व्यवहार नहीं करते, इसीलिए वे भौतिक दृष्टि से पिछड़े हुए हैं ।

राम उलटा-पुलटा वेदांत आपके पास नहीं लाया है, किंतु प्रकृति के मूल-स्रोतों से निकला हुआ असली वेदांत लाया है । अपनी बुद्धि और तर्क का प्रयोग करें और आप देखेंगे कि वेदांत कैसा अपूर्व है । प्रत्येक क्षेत्र में यह हमें कैसे सफलता दिलाता है और कैसे प्रत्येक को अपनी इच्छा के विरुद्ध भी वेदांत की रेखा तथा पद्धति पर चलना और उसके आदेशों का पालन करना पड़ता है ।

सफलता प्राप्त करने के लिए हमें एकसाथ कई मोर्चों पर काम करना पड़ता है । उनमें से किसी एक पर भी कमजोर होने से हाथों में आई सफलता फिसल जाती है । आगे हम इन्हीं पर विस्तार से चर्चा करेंगे, वेदांत से उनके संबंधों का पता लगाएंगे ।