पद 13
भैरवरूप शिव-स्तुति · राग वसन्त · पद 13 / 279
सेवहु सिव-चरन-सरोज-रेनु। कल्यान-अखिल-प्रद कामधेनू ॥ 1 ॥
कर्पूर-गौर, करुना-उदार। संसार-सार,भुजगेन्द्र-हार ॥ 2 ॥
सुख-जन्मभूमि,महिमा अपार। निर्गुन, गुननायक,निराकार ॥ 3 ॥
त्रयनयन,मयन-मर्दन महेस। अहँकार निहार-उदित दिनेस ॥ 4 ॥
बर बाल निसाकर मौलि भ्राज। त्रैलोक-सोकहर प्रमथराज ॥ 5 ॥
जिन्ह कहँ बिधि सुगति न लिखी भाल। तिन्ह की गति कासीपति कृपाल ॥ 6 ॥
उपकारी कोऽपर हर-समान। सुर-असुर जरत कृत गरल पान ॥ 7 ॥
बहु कल्प उपायन करि अनेक। बिनु संभु-कृपा नहिं भव-बिबेक ॥ 8 ॥
बिग्यान-भवन,गिरिसुता-रमन। कह तुलसिदास मम त्राससमन ॥ 9 ॥