श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद 14

देखो देखो, बन बन्यो आजु उमाकंत। मानों देखन तुमहिं आई रितु बसंत ॥ 1 ॥

जनु तनुदुति चंपक-कुसुम-माल। बर बसन नील नूतन तमाल ॥ 2 ॥

कलकदलि जंघ, पद कमल लाल। सूचत कटि केहरि, गति मराल ॥ 3 ॥

भूषन प्रसून बहु बिबिध रंग। नूपूर किंकिनि कलरव बिहंग ॥ 4 ॥

कर नवल बकुल-पल्लव रसाल। श्रीफल कुच, कंचुकिलता-जाल ॥ 5 ॥

आनन सरोज, कच मधुप गुंज। लोचन बिसाल नव नील कंज ॥ 6 ॥

पिक बचन चरित बर बर्हि कीर। सित सुमन हास,लीला समीर ॥ 7 ॥

कह तुलसिदास सुनु सिव सुजान। उर बसि प्रपंच रचे पंचबान ॥ 8 ॥

करि कृपा हरिय भ्रम-फंद काम। जेहि हृदय बसहिं सुखरासि राम ॥ 9 ॥