पद 14
भैरवरूप शिव-स्तुति · पद 14 / 279
देखो देखो, बन बन्यो आजु उमाकंत। मानों देखन तुमहिं आई रितु बसंत ॥ 1 ॥
जनु तनुदुति चंपक-कुसुम-माल। बर बसन नील नूतन तमाल ॥ 2 ॥
कलकदलि जंघ, पद कमल लाल। सूचत कटि केहरि, गति मराल ॥ 3 ॥
भूषन प्रसून बहु बिबिध रंग। नूपूर किंकिनि कलरव बिहंग ॥ 4 ॥
कर नवल बकुल-पल्लव रसाल। श्रीफल कुच, कंचुकिलता-जाल ॥ 5 ॥
आनन सरोज, कच मधुप गुंज। लोचन बिसाल नव नील कंज ॥ 6 ॥
पिक बचन चरित बर बर्हि कीर। सित सुमन हास,लीला समीर ॥ 7 ॥
कह तुलसिदास सुनु सिव सुजान। उर बसि प्रपंच रचे पंचबान ॥ 8 ॥
करि कृपा हरिय भ्रम-फंद काम। जेहि हृदय बसहिं सुखरासि राम ॥ 9 ॥