श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद १६

देवी-स्तुति · राग रामकली · पद १६ / २७९

जय जय जगजननि देवि सुर-नर-मुनि-असुर-सेवि,

भुक्ति-मुक्ति-दायनी,भय-हरणि कालिका।

मंगल-मुद-सिद्धि-सदनि,पर्वशर्वरीश-वदनि,

ताप-तिमिर-तरुण-तरणि-किरणमालिका ॥ १ ॥

वर्म, चर्म कर कृपाण, शूल-शेल-धनुषबाण,

धरणि,दलनि दानव-दल,रण-करालिका।

पूतना-पिंशाच-प्रेत-डाकिनी-शाकिनी-समेत,

भूत-ग्रह-बेताल-खग-मृगालि-जालिका ॥ २ ॥

जय महेश-भामिनी, अनेक-रूप-नामिनी,

समस्त-लोक-स्वामिनी,हिमशैल-बालिका।

रघुपति-पद परम प्रेम,तुलसी यह अचल नेम,

देहु ह्वै प्रसन्न पाहि प्रणत-पालिका ॥ ३ ॥