श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद १७

गंगा-स्तुति · राग रामकली · पद १७ / २७९

जय जय भगीरथनन्दिनि,मुनि-चय चकोर-चन्दिनि,

नर-नाग-बिबुध-बन्दिनि जय जह्नु बालिका।

बिस्नु-पद-सरोजजासि,ईस-सीसपर बिभासि,

त्रिपथगासि,पुन्यरासि,पाप-छालिका ॥ १ ॥

बिमल बिपुल बहसि बारि, सीतल त्रयताप-हारि,

भँवर बर बिभंगतर तरंग-मालिका।

पुरजन पूजोपहार,सोभित ससि धवलधार,

भंजन भव-भार, भक्ति-कल्पथालिका ॥ २ ॥

निज तटबासी बिहंग, जल-थल-चर पसु-पतंग,

कीट,जटिल तापस सब सरिस पालिका।

तुलसी तव तीर तीर सुमिरत रघुबंस-बीर,

बिचरत मति देहि मोह-महिष-कालिका ॥ ३ ॥