श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद २०८

श्रीराम-स्तुति · राग कल्याण · पद २०८ / २७९

नाथ सों कौन बिनती कहि सुनावौं।

त्रिबिध बिधि अमित अवलोकि अघ आपने,

सरन सनमुख होत सकुचि सिर नावौं ॥ १ ॥

बिरचि हरिभगतिको बेष बर टाटिका,

कपट-दल हरित पल्लवनि छावौं।

नामलगि लाइ लासा ललित-बचन कहि,

ब्याध ज्यों बिषय-बिहँगनि बझावौं ॥ २ ॥

कुटिल सतकोटि मेरे रोमपर वारियहि,

साधु गनतीमें पहलेहि गनावौं।

परम बर्बर खर्ब गर्ब-पर्बत चढ्यो,

अग्य सर्बग्य,जन-मनि जनावौं ॥ ३।

साँच किधौं झूठ मोको कहत कोउकोउ राम! रावरो, हौं तुम्हरो कहावौं।

बिरदकी लाज करि दास तुलसिहिं देव!

लेहु अपनाइ अब देहु जनि बावौ ॥ ४ ॥