श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद 21

यमुना-स्तुति · राग बिलावल · पद 21 / 279

जमुना यों ज्यों ज्यों लागी बाढ़न।

त्यों त्यों सुकृत-सुभट कलि भूपहिं, निदरि लगे बहु काढ़न ॥ 1 ॥

ज्यों ज्यों जल मलीन त्यों त्यों जमगन मुख मलीन लहै आढ़ न।

तुलसिदास जगदघ जवास ज्यों अनघमेघ लगे डाढ़न ॥ 2 ॥