श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद 23

चित्रकूट-स्तुति · राग बसन्त · पद 23 / 279

सब सोच-बिमोचन चित्रकूट। कलिहरन,करन कल्यान बूट ॥ 1 ॥

सुचि अवनि सुहावनि आलबाल। कानन बिचित्र,बारी बिसाल ॥ 2 ॥

मंदाकिनि-मालिनि सदा सींच। बर बारि,बिषम नर-नारि नीच ॥ 3 ॥

साखा सुसृंग,भूरुह-सुपात। निरझर मधुबर,मृदु मलय बात ॥ 4 ॥

सुक,पिक,मधुकर,मुनिबर बिहारु। साधन प्रसून फल चारि चारु ॥ 5 ॥

भव-घोरघाम-हर सुखद छाँह। थप्यो थिर प्रभाव जानकी-नाह ॥ 6 ॥

साधक-सुपथिक बडे भाग पाइ। पावत अनेक अभिमत अघाइ ॥ 7 ॥

रस एक,रहित-गुन-करम-काल। सिय राम लखन पालक कृपाल ॥ 8 ॥

तुलसी जो राम पद चहिय प्रेम। सेइय गिरि करि निरुपाधि नेम ॥ 9 ॥