श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद २५

हनुमत-स्तुति · राग धनाश्री · पद २५ / २७९

जयत्यंजनी-गर्भ-अंभोधि-संभूत विधु विबुध-कुल-कैरवानंदकारी।

केसरी-चारु-लोचन चकोरक-सुखद, लोकगन-शोक-संतापहारी ॥ १ ॥

जयति जय बालकपि केलि-कौतुक उदित-चंडकर-मंडल-ग्रासकर्त्ता।

राहु-रवि-शक्र-पवि-गर्व-खर्वीकरण शरण-भयहरण जय भुवन-भर्ता ॥ २ ॥

जयति रणधीर, रघुवीरहित,देवमणि,रुद्र-अवतार, संसार-पाता।

विप्र-सुर-सिद्ध-मुनि-आशिषाकारवपुष,विमलगुण,बुद्धि-वारिधि-विधाता ॥ ३ ॥

जयति सुग्रीव-ऋक्षादि-रक्षण-निपुण,बालि-बलशालि-बध-मुख्यहेतू।

जलधि-लंघन सिंह सिंहिंका-मद-मथन,रजनिचर-नगर-उत्पात-केतू ॥ ४ ॥

जयति भूनन्दिनी-शोच-मोचन विपिन-दलन घननादवश विगतशंका।

लूमलीलाऽनल-ज्वालमालाकुलित होलिकाकरण लंकेश-लंका ॥ ५ ॥

जयति सौमित्र रघुनंदनानंदकर,ऋक्ष-कपि-कटक-संघट-विधायी।

बद्ध-वारिधि-सेतु अमर-मंगल-हेतु,भानुकुलकेतु-रण-विजयदायी ॥ ६ ॥

जयति जय वज्रतनु दशन नख मुख विकट,चंड-भुजदंड तरु-शैल-पानी।

समर-तैलिक-यंत्र तिल-तमीचर-निकर,पेरि डारे सुभट घालि घानी ॥ ७ ॥

जयति दशकंठ-घटकर्ण-वारिद-नाद-कदन-कारन,कालनेमि-हंता।

अघटघटना-सुघट सुघट-विघटन विकट,भूमि-पाताल-जल-गगन-गंता ॥ ८ ॥

जयति विश्व-विख्यात बानैत-विरुदावली,विदुष बरनत वेद विमल बानी।

दास तुलसी त्रास शमन सीतारमण संग शोभित राम-राजधानी ॥ ९ ॥