पद २६
जयति मर्कटाधीश ,मृगराज-विक्रम,महादेव,मुद-मंगलालय,कपाली।
मोह-मद-क्रोध-कामादि-खल-संकुला,घोर संसार-निशि किरणमाली ॥ १ ॥
जयति लसदंजनाऽदितिज,कपि-केसरी-कश्यप-प्रभव,जगदार्त्तिहर्त्ता।
लोक-लोकप-कोक-कोकनद-शोकहर,हंस हनुमान कल्यानकर्ता ॥ २ ॥
जयति सुविशाल-विकराल-विग्रह,वज्रसार सर्वांग भुजदण्ड भारी।
कुलिशनख, दशनवर लसत,बालधि बृहद, वैरि-शस्त्रास्त्रधर कुधरधारी ॥ ३ ॥
जयति जानकी-शोच-संताप-मोचन,रामलक्ष्मणानंद-वारिज-विकासी।
कीस-कौतुक-केलि-लूम-लंका-दहन,दलन कानन तरुण तेजरासी ॥ ४ ॥
जयति पाथोधि-पाषाण-जलयानकर,यातुधान-प्रचुर-हर्ष-हाता।
दुष्टरावण-कुंभकर्ण-पाकारिजित-मर्मभित्,कर्म-परिपाक-दाता ॥ ५ ॥
जयति भुवननैकभूषण,विभीषणवरद,विहित कृत राम-संग्राम साका।
जयति पर-यत्रंमंत्राभिचार-ग्रसन,कारमन-कूट-कृत्यादि-हंता।
शाकिनी-डाकिनी-पूतना-प्रेत-वेताल-भूत-प्रमथ-यूथ-यंता ॥ ७ ॥
पुष्पकारूढ़ सौमित्रि-सीता-सहित,भानु-कुलभानु-कीरति-पताका ॥
जयति वेदान्तविद विविध-विद्या-विशद,वेद-वेदांगविद ब्रह्मवादी।
ज्ञान- विज्ञान-वैराग्य-भाजन विभो,विमल गुण गनति शुकनारदादी ॥ ८ ॥
जयति काल-गुण-कर्म-माया-मथन, निश्चलज्ञान,व्रत-सत्यरत,धर्मचारी।
सिद्ध-सुरवृंद-योगींद्र-सेवति सदा,दास तुलसी प्रणत भय-तमारी ॥ ९ ॥