श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद ५१

श्रीराम-स्तुति · पद ५१ / २७९

देव

जानकीनाथ,रघुनाथ,रागादि-तम-तरणि,तारुण्यतनु,तेजधामं।

सच्चिदानंद,आनंदकंदाकरं,विश्व-विश्राम,रामाभिरामं ॥ १ ॥

नीलनव-वारिधर-सुभग-शुभकांति,कटि पीत कौशेय वर वसनधारी।

रत्न-हाटक-जटित-मुकुट-मंडित-मौलि,भानु-शत-सदृश उद्योतकारी ॥ २ ॥

श्रवण कुंडल,भाल तिलक,भूरुचिर अति,अरुण अंभोज लोचन विशालं।

वक्र-अवलोक,त्रैलोक-शोकापहं,मार-रिपु-ह्रदय-मानस-मरालं ॥ ३ ॥

नासिका चारु सुकपोल,द्विज वज्रदुति,अधर बिंबोपमा,मधुरहासं।

कंठ दर,चिबुक वर,वचन गंभीरतर,सत्य-संकल्प,

सुरत्रास-नासं ॥ ४ ॥

सुमन सुविचित्र नव तुलसिकादल-युतं मृदृल वनमाल उर भ्राजमानं।

भ्रमत आमोदवश मत्त मधुकर-निकर,मधुरतर मुखर कुर्वन्ति गानं ॥ ५ ॥

सुभग श्रीवत्स,केयूर,कंकण,हार,किंकणी-रटनि कटि-तट रसालं।

वाम दिसि जनकजासीन-सिंहासनं कनक-मृदुवल्लित तरु तमालं ॥ ६ ॥

आजानु भुजदंड कोदंड-मंडित वाम बाहु, दक्षिण पाणि बाणमेकं।

अखिल मुनि-निकर,सुर,सिद्ध,गंधर्व वर नमत नर नाग अवनिप अनेकं ॥

अनघ अविछिन्न,सर्वज्ञ,सर्वेश, खलु सर्वतोभद्र-दाताऽसमाकं।

प्रणतजन-खेद-विच्छेद-विद्या-निपुण नौमि श्रीराम सौमित्रिसाकं ॥ ८ ॥

युगल पदपद्म,सुखसद्म पद्मालयं, चिन्ह कुलिशादि शोभाति भारी।

हनुमंत-ह्रदि विमल कृत परममंदिर, सदातुलसी-शरण शोकहारी ॥