श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद ६८

श्रीराम-स्तुति · पद ६८ / २७९

राम राम राम जीह जौलौं तू न जपिहै।

तौलौं,तू कहूँ जाय, तिहूँ ताप तपिहै ॥ १ ॥

सुरसरि-तीर बिनु नीर दुख पाइहै।

सुरतरु तरे तोहि दारिद सताइहै ॥ २ ॥

जागत,बागत सपने न सुख सोइहै।

जनम जनम,जुग जुग जग रोइहै ॥ ३ ॥

छूटिबेके जतन बिसेष बाँधो जायगो।

ह्वेहै बिष भोजन जो सुधा-सानि खायगो ॥ ४ ॥

तुलसी तिलोक,तिहूँ काल तोसे दीनको।

रामनाम ही की गति जैसे जल मीनको ॥ ५ ॥