श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद 68

राम राम राम जीह जौलौं तू न जपिहै।

तौलौं,तू कहूँ जाय, तिहूँ ताप तपिहै ॥ 1 ॥

सुरसरि-तीर बिनु नीर दुख पाइहै।

सुरतरु तरे तोहि दारिद सताइहै ॥ 2 ॥

जागत,बागत सपने न सुख सोइहै।

जनम जनम,जुग जुग जग रोइहै ॥ 3 ॥

छूटिबेके जतन बिसेष बाँधो जायगो।

ह्वेहै बिष भोजन जो सुधा-सानि खायगो ॥ 4 ॥

तुलसी तिलोक,तिहूँ काल तोसे दीनको।

रामनाम ही की गति जैसे जल मीनको ॥ 5 ॥