श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद 70

भलो भली भाँति है जो मेरे कहे लागिहै।

मन राम-नामसों सुभाय अनुरागिहै ॥ 1 ॥

राम-नामको प्रभाउ जानि जूड़ी आगिहै।

सहित सहाय कलिकाल भीरु भागिहै ॥ 2 ॥

राम-नामसों बिराग,जोग,जप जागिहै।

बाम बिधि भाल हू न करम दाग दागिहै ॥ 3 ॥

राम-नाम मोदक सनेह सुधा पागिहै।

पाइ परितोष तू न द्वार द्वार बागिहै ॥ 4 ॥

राम-नाम काम-तरु जोइ जोइ माँगिहै।

तुलसिदास स्वारथ परमारथ न खाँगिहै ॥ 5 ॥