पद 70
श्रीराम-स्तुति · पद 70 / 279
भलो भली भाँति है जो मेरे कहे लागिहै।
मन राम-नामसों सुभाय अनुरागिहै ॥ 1 ॥
राम-नामको प्रभाउ जानि जूड़ी आगिहै।
सहित सहाय कलिकाल भीरु भागिहै ॥ 2 ॥
राम-नामसों बिराग,जोग,जप जागिहै।
बाम बिधि भाल हू न करम दाग दागिहै ॥ 3 ॥
राम-नाम मोदक सनेह सुधा पागिहै।
पाइ परितोष तू न द्वार द्वार बागिहै ॥ 4 ॥
राम-नाम काम-तरु जोइ जोइ माँगिहै।
तुलसिदास स्वारथ परमारथ न खाँगिहै ॥ 5 ॥