पद ९
शिव स्तुति · पद ९ / २७९
सिव! सिव! होइ प्रसन्न करु दाया।
करुनामय उदार कीरति,बलि जाउँ हरहु निज माया ॥ १ ॥
जलज-नयन,गुन-अयन,मयन-रिपु,महिमा जान न कोई।
बिनु तव कृपा राम-पद-पंकज, सपनेहुँ भगति न होई ॥ २ ॥
रिषय,सिद्ध,मुनि,मनुज,दनुज,सुर,अपर जीव जग माहीं।
तव पद बिमुख न पार पाव कोउ, कलप कोटि चलि जाहीं ॥ ३ ॥
अहिभूषन,दूषन-रिपु-सेवक, देव-देव, त्रिपुरारी।
मोह-निहार-दिवाकर संकर, सरन सोक-भयहारी ॥ ४ ॥
गिरिजा-मन-मानस-मराल, कासीस, मसान-निवासी।
तुलसिदास हरि-चरन-कमल-बर, देहु भगति अबिनासी ॥ ५ ॥