श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद ८

शिव स्तुति · पद ८ / २७९

देव बड़े,दाता बड़े, संकर बड़े भोरे।

किये दूर दुख सबनिके , जिन्ह-जिन्ह कर जोरे ॥ १ ॥

सेवा, सुमिरन, पूजिबौ, पात आखत थोरे।

दिये जगत जहँ लगि सबै,सुख,गज,रथ,घोरे ॥ २ ॥

गावँ बसत बामदेव, मैं कबहूँ न निहोरे।

अधिभौतिक बाधा भई, ते किंकर तोरे ॥ ३ ॥

बेगि बोलि बलि बरजिये, करतूति कठोरे।

तुलसी दलि, रूँध्यो चहैं सठ साखि सिहोरे ॥ ४ ॥