पद 8
शिव स्तुति · पद 8 / 279
देव बड़े,दाता बड़े, संकर बड़े भोरे।
किये दूर दुख सबनिके , जिन्ह-जिन्ह कर जोरे ॥ 1 ॥
सेवा, सुमिरन, पूजिबौ, पात आखत थोरे।
दिये जगत जहँ लगि सबै,सुख,गज,रथ,घोरे ॥ 2 ॥
गावँ बसत बामदेव, मैं कबहूँ न निहोरे।
अधिभौतिक बाधा भई, ते किंकर तोरे ॥ 3 ॥
बेगि बोलि बलि बरजिये, करतूति कठोरे।
तुलसी दलि, रूँध्यो चहैं सठ साखि सिहोरे ॥ 4 ॥