पद ९५
श्रीराम-स्तुति · पद ९५ / २७९
तरु न मेरे अघ-अवगुन गनिहैं ।
जौ जमराज काज सब परिहरि, इहै ख्याल उर अनिहैं ॥ १ ॥
चलिहैं छूटि पुंज पापिनके , असमंजस जिय जनिहैं ।
देखि खलल अधिकार प्रभूसों (मेरी) भूरि भलाई भनिहैं ॥ २ ॥
हँसि करिहैं परतीति भगतकी भगत-सिरोमनि मनिहैं ।
ज्यों त्यों तुलसिदास कोसलपति अपनायेहि पर बनिहैं ॥ ३ ॥