भजनमन राम चरन दिन राती वे भजमन
1. भर-भर आव मिटे रस ध्यावत, हरि चर्चा; रामा हरि चर्चा वे सुहाती वे भजनमन
2. रसना कस न भजे तू हरि पद; सुमिरन क्यों अलसाती वे भजमन
3. जाके कहत दहत दुख दारूण, सन जिया ताप रामा; सन जिया ताप बुझाती वे भजमन
4. पढ़ते श्रवण सुयश रघुवर के, अति हिय जुड़ा वे रामा; अति ही जुड़ा हिय छाती वे भजमन
5. श्रोता सुम्मत सुशील सो हरिजन, देत सलाह वे रामा; देत सलाह वे सुहाती वे भजमन
6. रामचन्द्र जी का नाम अमियरस, सोरल काहे वे रामा; सोरल काहे को न खाती वे भजमन
7. सोलह सम्मत सहे इकतीसा, जेठ माघ रामा; जेठ माघं सुहावती वे भजमन